
प्रकृति और मानव का रिश्ता सदियों पुराना है, लेकिन आज यह रिश्ता एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। हमने तरक्की की और मैं यह भूल गया की साफ हवा, शुद्ध पानी और हरी-भरी धरती कोई मुफ्त का उपहार नहीं बल्कि जीने का एक उद्देश्य है। आज जब हम बिन मौसम बारिश, भयंकर गर्मी का सामना कर रहे हैं तो यह साफ है की प्रकृति अपना संतुलन खो रही है। पर्यावरण संरक्षण सिर्फ किताब में पढ़ने का स्रोत नहीं रहा गया है। अगर हमने आज अपनी धरती का ख्याल नहीं रखें आने वाली पीढ़ियां के पास विरासत में सिर्फ ढेर सारी बीमारियां ही बचेंगे। अब वक्त बातों का नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने का है इसके लिए हमें हरा-भरा पेड़ लगाने होंगे। समुद्र, नदी, तालाब के पानी को प्रदूषित नहीं करने होंगे।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का ख़तरा

पर्यावरण को बचाने की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल वार्मिंग है। इंसान ने अपनी सुविधाओं के लिए जितना ज्यादा जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल) जलाया है, उससे कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बहुत बढ़ गई है। इसका नातिजा ये है कि धरती का तपमान हर साल बढ़ता जा रहा है। आपने महसूस किया होगा कि अब गर्मी पहले से ज्यादा लंबी और भयावह होती है, और ठंड का मौसम छोटा हो रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिसका कारण समुद्र का तारा (समुद्र तल) बढ़ रहा है। अगर ये इसी तरह चलता रहा, तो दुनिया के कई बड़े शहर जो समुद्र के किनारे बसे हैं, वो पूरी तरह डूब सकते हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम का चक्र बिगड़ गया है; कहीं बे-मौसम बारिश हो रही है तो कहीं भयंकर सूखा पड़ रहा है। ये सब संकेत हैं कि प्रकृति अब और दबाव झेलने की स्थिति में नहीं है और हमें कार्बन उत्सर्जन कम करने की जरूरत है।
प्रदुषण: एक धीमा जहर

प्रदूषण हमारे पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्मन है और ये कौन सा रूप हमारे सामने है। वायु प्रदूषण (वायु प्रदूषण) की वजह से आज हर तीसरा व्यक्ति सांस की बीमारी से जूझ रहा है। शहर की हवा में इतना ज़हर घुल चुका है कि ये रोज़ाना ढेरों सिगरेट पीने के बराबर नुक्सान पाहुंचा रही है। दूसरी तरफ, जल प्रदूषण (जल प्रदूषण) ने हमारी नदियों और समुंद्रों को कचरे का ढेर बना दिया है। फैक्ट्री का रासायनिक कचरा और शहर का गंदा पानी बिना किसी उपचार के नदियों में बहा दिया जाता है, जिसे पीने लायक पानी की भारी कमी हो रही है। मिट्टी का प्रदूषण (मृदा प्रदूषण) भी उतना ही खतरनाक है क्योंकि खेती में अधिक कीटनाशकों और रसायनों के इस्तमाल से ज़मीन की उपजौ शक्ति खत्म हो रही है और वही जहर हमारे खाने के लिए जरूरी है हमारे शरीर में पाहुंच रहा है। सभी तरह से प्रदूषण को रोकना पर्यावरण संरक्षण का सबसे पहला कदम होना चाहिए।
जैव विविधता अर्थात जैव-विविधता की रक्षा

धरती पर सिर्फ इंसान ही नहीं रहते, बाल्की लाखों तरह के पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े और पेड़-पौधे रहते हैं। ये सब मिलकर एक ‘पारिस्थितिकी संतुलन’ बनाते हैं। जब हम अपने घर बनाते हैं या खेती के लिए जंगलों को काटते हैं, तो हम मासूम जीवों का घर छीन लेते हैं। पिछले कुछ सालों में काई प्रजातियान (प्रजाति) हमेशा के लिए विलुप्त हो चुकी हैं। हर एक जीव का इस धरती पर एक खास काम है; मिसाल के तौर पर, अगर मधुमखियां ख़तम हो जाएंगी तो परागण नहीं होगा और फसलें उगना बंद हो जाएंगी। जंगलों की कटाई (वनों की कटाई) से ना सिर्फ वन्य जीवन खत्म हो रहा है, बल्कि ऑक्सीजन का स्तर भी गिर रहा है क्योंकि पेड़ ही हमें साफ हवा देते हैं। पर्यावरण संरक्षण का मतलब है हर उस जीव-जंतु को बचाना जो पारिस्थितिकी तंत्र का हिसा है, क्योंकि उनके बिना इंसानी जीवन का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
प्राकृतिक संसाधन का सही उपयोग

हम अक्सर प्राकृतिक संसाधन (प्राकृतिक संसाधन) जैसे पानी, कोयला, और खनिजों को ऐसे व्यवस्थित करते हैं जैसे ये कभी ख़त्म ही नहीं होंगे। लेकिन सच्ची ये है कि ये सब सिमित है। पानी की बर्बादी आज के समय का एक घबराने वाला विषय है। दुनिया के कई बड़े शहर ‘डे जीरो’ की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां नालो में पानी आना बंद हो जाएगा। हम भूजल का इतना अधिक निष्कासन कर रहे हैं कि जमीन के अंदर का जल स्तर बहुत नीचे चला गया है। इसके अलावा, बिजली बनाने के लिए कोयला जलाना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए जरूरी है कि हम ‘नवीकरणीय ऊर्जा’ यानि सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा (पवन ऊर्जा) की तरफ बढ़ें। हमें अपने संसाधनों का इस्तेमाल ‘स्थिरता’ के साथ करना होगा—यानी हम अपनी जरूरी उतनी ही पूरी करें जितनी जरूरी हो, ताकि आने वाली पीढिय़ों के लिए भी कुछ बचा रहे।
प्लास्टिक प्रदूषण और उसका समाधान

प्लास्टिक आज के युग का एक ऐसा अभिशाप बन गया है जो ख़त्म होने का नाम नहीं लेता। एक प्लास्टिक की बोतल या बैग को पूरी तरह खत्म होने में सैक्डों साल लगते हैं। हम प्लास्टिक का इस्तमाल कुछ मिनटों के लिए करते हैं, लेकिन वो धरती पर हजारों साल तक कचरे के रूप में पड़ा रहता है। ये प्लास्टिक हमारी नदियों से होता हुआ समुंदरों में घूमता है, जहां समुद्र जीव इसे गलती से खा लेते हैं और मर जाते हैं। ज़मीन में दबा हुआ प्लास्टिक मिट्टी की उर्वर शक्ति को नष्ट करता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘सिंगल-यूज़ प्लास्टिक’ पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना और प्लास्टिक को रीसायकल करना जरूरी है। हमें पुराने ज़माने की तरह कपड़े के थैलों और मिट्टी के बर्तनों का इस्तमाल फिर से शुरू करना होगा ताकि हम अपनी धरती को प्लास्टिक के इस ढेर से बचा सकें। Environment संरक्षण का महत्व
जंगलो का महत्व और वृक्षरोपन
पेड़ धरती के ‘फेफड़े’ यानि फेफड़े हैं। वो पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोते हैं और हमें जीवनदायी ऑक्सीजन देते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, प्रगति के नाम पर हर साल लाखों हेक्टेयर जंगल साफ किये जा रहे हैं। पेड़ों की कमी की वजह से ही बारिश का पैटर्न बदल गया है और ज़मीन का कटाव (मिट्टी का कटाव) बढ़ गया है। पर्यावरण संरक्षण में वृक्षरोपण का बहुत बड़ा योगदान है। सिर्फ पेड़ लगाना काफी नहीं है, लेकिन उन्हें बड़ा होने तक उनकी देखभाल करना भी जरूरी है। जंगलों को बचाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि वो बारिश लेन में मदद करते हैं और तपमान को नियंतृत रखते हैं। हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम 10 पेड़ लगाने का संकल्प लेना चाहिए। अगर हम अपने आस-पास हरियाली बढ़ाएंगे, तो धरती का तपमान अपने आप कम होने लगेगा और हवा भी साफ होगी।
सरकार और समाज की ज़िम्मेदारी

पर्यावरण संरक्षण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि ये हर नागरिक का कर्तव्य है। हांया, सरकार को कड़े नियम बनाने चाहिए ताकि फैक्ट्री से निकलने वाला प्रदूषण रोका जा सके और अवैध कटाई (पेड़ों की कटाई) पर रोक लगे। लेकिन जब तक समाज का हर व्यक्ति जागरूक नहीं होगा, तब तक कोई भी कानून पूरी तरह से काम नहीं कर पायेगा। हमें स्कूल स्टार से ही बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। ‘कम करें, दोबारा इस्तेमाल करें, रीसायकल करें’ की अवधारणा को अपने जीवन का मंत्र बनाना होगा। स्वच्छ भारत अभियान जैसे प्रयास दिखाते हैं कि अगर लोग मिलकर काम करें, तो बदलाव मुमकिन है। हमें जल संचयन प्रणाली को हर घर में लगाना चाहिए और कचरे का सही निपटान (अपशिष्ट प्रबंधन) करना चाहिए। एक जागरूक समाज ही एक स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण कर सकता है।
निष्कर्ष
पर्यावरण संरक्षण की जरुरत आज पहले से कहीं ज्यादा है क्योंकि हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां से वापसी मुश्किल है। धरती हमें सब कुछ देती है—खाना, पानी, हवा और रहने की जगह। लेकिन बदले में हमने इसे सिर्फ प्रदूषण और गंदगी दी है। अब वक्त आ गया है कि हम अपनी गलतियों को सुधारें। पर्यावरण को बचाना किसी एक देश या व्यक्ति का काम नहीं है, ये पूरी मानव जाति की साझी ज़िम्मेदारी है। छोटी-छोटी कोशिशें जैसे बिजली बचाना, पानी की बर्बादी रोकना, कम से कम प्लास्टिक का उपयोग करना और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना, आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव ला सकती हैं। याद रखो, धरती के पास इंसान की ज़रूरत पूरी करने के लिए सब कुछ है, लेकिन इंसान के लालच के लिए कुछ नहीं। अगर हम आज प्रकृति का सम्मान करेंगे, तभी प्रकृति कल हमारा साथ देगी। एक हरीभरी और साफ धरती ही हमारी असली संपत्ति है, और इसे बचाना ही हमारा सबसे बड़ा धर्म होना चाहिए।
