रूस की ताकत, पुतिन के जलजले के आगे ट्रंप की निकल गई सारी हेकड़ी! टैरिफ धमकी को लिया वापस, अब खुद मांग रहे समय

ग्लोबल पॉलिटिक्स के लाइफ में हंगामे न हो तो तो यह अशंभव है |ग्लोबल मार्किट में टैरिफ के कारण थोरा टेंशन में चल रहा है | अब एक बार फिर से डोनाल्ड ट्रम्प के प्रस्तावित उच्च टैरिफ का मुद्दा सामने आया है, जिसने आयात पर कठिन शुल्क लगाने की बात कही है।रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के कड़े रुख के सामने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी आक्रामक नीति वापस लेनी पड़ी। ये स्थिति एक तरह से वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा उदाहरण है जहां एक देश की राजनीतिक शक्ति और आर्थिक रणनीति दूसरे देश के निर्णय लेने पर सीधे प्रभाव डालती है। ट्रम्प ने जो टैरिफ की धमकी दी थी उसको अब उन्होंने वापस ले लिया है और स्थिति को संभालने के लिए रूस से समय मांग रहे हैं। क्या घटना ने दुनिया को ये दिखाया कि रूस की ताकत अब भी वैश्विक राजनीति में एक प्रमुख कारक है और पुतिन के सामने अमेरिका को अपना रुख नरम करना पड़ा।

ट्रम्प की टैरिफ नीति और उसकी पृष्ठभूमि

डोनाल्ड ट्रंप जब से राजनीति में आए हैं उनकी नीतियां काफी बोल्ड और विवादास्पद रही हैं। उनका मुख्य फोकस हमेशा अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी पर है जिसमें विदेशी आयात पर टैरिफ लगा कर अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करने की कोशिश की जाती है। लेकिन जब उन्हें रूस ने टैरिफ के खिलाफ धमकी दी तो उन्हें लगा कि इस पर रूस पर दबाव बनेगा और वह बातचीत की मेज पर आ जाएगी। लेकिन पुतिन ने इस धमाके को हल्के से लेने के बजाय सीधे इसका जवाब देना शुरू कर दिया। रूस ने स्पष्ट संकेत दिया कि वो किसी भी बाहरी दबाव के सामने झुकने वाले नहीं हैं, चाहे वो अमेरिका ही क्यों ना हो। ये ट्रम्प के लिए एक अप्रत्याशित चुनौती थी जिसकी पूरी रणनीति ध्वस्त हो गई

पुतिन की मज़बूत स्थिति और रूस की ताकत

व्लादिमीर पुतिन अपने मजबूत फैसले और समझौता न करने वाले रवैये के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। उनका एक ही संदेश होता है कि रूस किसी भी देश के दबाव में अपनी नीति में बदलाव नहीं करेगा। रूस के पास प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है जिसका तेल और गैस सबसे बड़ा आर्थिक हथियार है। यूरोप काफ़ी हद तक रूस की ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर है और ये पुतिन के लिए एक मजबूत कार्ड बन गया है। जब ट्रंप ने टैरिफ की धमकी दी तो पुतिन ने इसे एक राजनीतिक स्टंट समझकर इग्नोर करने के बजाये इसे एक अवसर में बदल दिया। अपनी शक्ति और संसाधनों का उपयोग करके ट्रम्प की नीति को व्यावहारिक रूप से बेकार बना दिया।

ट्रंप की बैकफुट पर आने की मजबूरी

जब ट्रंप ने देखा कि पुतिन की तरफ से कोई बातचीत नहीं आ रही है और रूस अपने स्टैंड पर और भी मजबूत हो रहा है तो उनके पास अपना कदम वापस लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। अगर वो अपनी टैरिफ नीति जारी रखें तो इसका नुक्सान खुद अमेरिका की अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ेगा। रूसी तेल और गैस की आपूर्ति को रोकना व्यावहारिक रूप से असंभव है और अगर अमेरिका इसका विकल्प प्रदान नहीं कर पाता तो वैश्विक बाजार परेशान हो जाते हैं। इसी वजह से ट्रंप को बैकफुट पर आना पड़ा और खुलेआम अपना फैसला वापस ले लिया। अब वो रूस से समय मांग रहे हैं जिससे स्थिति को कूटनीतिक तरीके से संभाला जा सके।

वैश्विक कूटनीति और राजनीतिक प्रभाव

क्या घटना का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक कूटनीति पर हुआ है? ये स्पष्ट रूप से दिख गया कि सिर्फ सैन्य ताकत या राजनीतिक धमकी से आज के जमाने में काम नहीं चलता। आर्थिक स्थिरता और प्राकृतिक संसाधन भी एक देश की वैश्विक शक्ति तय करते हैं। पुतिन ने अपने कार्यों से साबित कर दिया कि रूस अब भी एक महाशक्ति है जिसका प्रभाव सीधे अमेरिका पर भी पड़ेगा। ट्रंप की पलटीबाजी ने उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचाया है और उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है जो अपनी नीति पर कायम नहीं रह सके। रूस की ताकत

रूस-अमेरिका रिश्ते का नया चैप्टर

ये पूरा मामला रूस-अमेरिका रिश्ते का एक नया चैप्टर खुला करता है। दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और संघर्ष हमेशा से रहे हैं, लेकिन इस बार रूस का पलड़ा साफ दिख रहा है। ट्रंप की कमजोरी और पुतिन की ताकत ने इस बात को उजागर किया है कि आने वाले समय में अमेरिका को रूस के साथ संतुलन बनाकर चलना पड़ेगा। अगर उन्हें अपनी आक्रामक नीतियां जारी रखनी हैं तो इसका नतीजा सिर्फ अमेरिका के खिलाफ ही होगा।

आर्थिक कोण और बाजार पर असर

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और बाज़ार पर इसका सीधा असर देखने को मिला। जब ट्रंप ने टैरिफ वापस लिया तो वैश्विक तेल कीमतों में स्थिरता आई और निवेशकों ने इसे एक सकारात्मक संकेत माना। रूस के पास संसाधनों का भंडार होने के कारण उनकी अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि उन्हें अपनी स्थिति को और मजबूत बनाना पड़ा। अमेरिका को ये एहसास करना पड़ा कि उनकी टैरिफ नीति रूस के खिलाफ प्रभावी नहीं हो सकती।

जनता और राजनीतिक प्रतिक्रिया

अमेरिका में ट्रंप की इस चाल को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने कहा कि ये एक परिपक्व निर्णय था जिसने अनावश्यक आर्थिक युद्ध से अमेरिका को बचा लिया। लेकिन उनके विरोधियों ने इसे उनकी कमजोरी का सबूत बता दिया और कहा कि ट्रंप सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन जब वास्तविक ताकत दिखती है तो पीछे हट जाते हैं। रूस में इसको एक जीत के रूप में जश्न मनाया गया और पुतिन के नेतृत्व को और ज्यादा सराहा गया।

अमेरिका-रूस संबंधों का भविष्य

आने वाले दिनों में ये दिलचस्प होगा देखना अमेरिका और रूस के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं। ट्रम्प की पलटीबाजी ने एक स्पष्ट संकेत दे दिया है कि रूस के साथ मजबूत कूटनीति के बिना चलना संभव नहीं है। अगर दोनों देश आपस में सहयोग करते हैं तो विश्व राजनीति में एक नए संतुलन की शुरुआत हो सकती है, लेकिन अगर अहंकार और सत्ता संघर्ष जारी रहेगा तो और भी संघर्ष निकल कर आ सकते हैं।

निष्कर्ष

रूस और अमेरिका के बीच हुआ ये राजनीतिक रस्साकशी एक बार फिर ये दिखता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंध सिर्फ धमकी और पावर शो से नहीं संभलते। पुतिन ने अपने मजबूत नेतृत्व और रूस की आर्थिक शक्ति का इस्तेमाल करके ट्रंप को बैकफुट पर ला दिया। ट्रम्प की टैरिफ धमकी का वापस लिया जाना उनके लिए एक राजनीतिक झटका है लेकिन रूस के लिए एक कूटनीतिक जीत। ये घटना एक अनुस्मारक है कि विश्व राजनीति में हर कदम सावधानीपूर्वक योजना बनाना पड़ता है और संसाधनों के बिना सिर्फ सैन्य शक्ति काफी नहीं होती। आने वाले समय में दोनों देशों का व्यवहार तय करेगा कि वैश्विक राजनीति का भविष्य किस तरफ जाएगा, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट है कि पुतिन की ताकत के सामने ट्रंप को अपना आक्रामक रुख नरम करना पड़ा है।

Leave a Comment